Key Takeaways
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करवा चौथ पर कई महिलाएं सुबह से चांद निकलने तक निर्जला व्रत रखती हैं। लेकिन अगर आपको डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी है और आप नियमित दवाएं लेती हैं, तो व्रत रखने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है।
पानी और भोजन के बिना लंबे समय तक रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। डायबिटीज़ में कुछ दवाओं के साथ ब्लड शुगर कम होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। वहीं, कुछ BP और दिल की दवाएं शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं (NIDDK, 2020)।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला के लिए व्रत का जोखिम एक जैसा होगा। आपकी बीमारी, दवाओं और स्वास्थ्य की मौजूदा स्थिति के आधार पर डॉक्टर आपको सलाह दे सकते हैं।
करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने से पहले ये 5 बातें जान लें
1. डायबिटीज़ है तो ब्लड शुगर का ध्यान रखें
अगर आपको डायबिटीज़ है, तो पूरे दिन बिना भोजन के रहने से ब्लड शुगर में बदलाव हो सकता है। इंसुलिन और कुछ शुगर कम करने वाली दवाएं लेने वाली महिलाओं में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर कम होने का जोखिम बढ़ सकता है। दूसरी ओर, दवा की खुराक खुद से कम करने या छोड़ने पर ब्लड शुगर बढ़ भी सकती है (Kalra et al., 2015)।
इसके लक्षणों में कंपकंपी, पसीना आना, अचानक भूख लगना, चक्कर, घबराहट और भ्रम शामिल हो सकते हैं। ब्लड शुगर बहुत बढ़ने पर भी डिहाइड्रेशन का जोखिम बढ़ सकता है।
क्या करें? व्रत रखने से पहले डॉक्टर से पूछें कि आपकी मौजूदा स्थिति में उपवास सुरक्षित है या नहीं। अगर डॉक्टर व्रत रखने की अनुमति देते हैं, तो उनसे यह भी जानें कि ब्लड शुगर कब जांचनी है और उसके कम या अधिक होने पर क्या करना है।
अगर ब्लड शुगर कम होने के लक्षण दिखाई दें, तो व्रत जारी रखने की ज़िद न करें। डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार तुरंत कदम उठाएं।
क्या डायबिटीज़ या दिल की बीमारी के कारण करवा चौथ का व्रत रखने को लेकर चिंतित हैं?
2. BP और दिल की दवाएं खुद से बंद न करें
कुछ महिलाएं व्रत के कारण अपनी नियमित दवाएं छोड़ देती हैं या उन्हें लेने का समय बदल देती हैं। ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
कुछ दवाएं, खासकर पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं और कुछ डायबिटीज़ की दवाएं, शरीर में तरल पदार्थों की कमी का जोखिम बढ़ा सकती हैं। उपवास के दौरान दवा के समय या खुराक में बदलाव की जरूरत है या नहीं, यह दवा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
क्या करें? व्रत से पहले अपनी सभी दवाओं की सूची डॉक्टर को दिखाएं। दवा भोजन के साथ लेनी है या नहीं और उसके समय या खुराक में बदलाव की ज़रूरत है या नहीं, यह डॉक्टर से पूछें। अपनी मर्ज़ी से कोई दवा बंद न करें।
3. डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत पहचानें
निर्जला व्रत में पानी न पीने के कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो सकती है। गर्मी, पसीना आने और कुछ दवाएं लेने से यह जोखिम बढ़ सकता है। डायबिटीज़ में ब्लड शुगर बहुत बढ़ने पर भी शरीर से अधिक तरल निकल सकता है।
डिहाइड्रेशन के कुछ संकेत हैं:
- मुंह सूखना और बहुत प्यास लगना
- सिरदर्द या चक्कर आना
- खड़े होने पर कमजोरी महसूस होना
- पेशाब कम होना या उसका रंग गहरा होना
- असामान्य थकान या बेचैनी
क्या करें? व्रत से पहले और व्रत खोलने के बाद पर्याप्त तरल पदार्थ लें, लेकिन अगर डॉक्टर ने दिल या किडनी की बीमारी के कारण पानी सीमित रखने को कहा है, तो उनकी सलाह का पालन करें।
अगर चक्कर या कमजोरी बढ़ रही है, तो इसे केवल भूख या थकान न समझें। स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और ज़रूरत पड़ने पर व्रत रोककर चिकित्सकीय सलाह लें।
4. व्रत से पहले और बाद में भोजन का संतुलन रखें
व्रत से पहले संतुलित भोजन लेना और उपवास के दौरान अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना उपयोगी है। डायबिटीज़ में उपवास के दौरान भोजन और दवाओं की योजना पहले से बनाना विशेष रूप से ज़रूरी है।
व्रत खोलते समय भी एक साथ बहुत अधिक भोजन करने के बजाय धीरे-धीरे खाएं। डायबिटीज़ होने पर अधिक मिठाई या मीठे पेय लेने से ब्लड शुगर बढ़ सकती है।
क्या करें? अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार भोजन की योजना बनाने के लिए डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें। दवा लेने वाली महिलाएं भोजन और दवा से जुड़े निर्देशों का पालन करें। व्रत खोलने के बाद भी दवा की खुराक खुद से न बदलें।
5. तबीयत बिगड़ने पर व्रत जारी न रखें
व्रत के दौरान चक्कर, कंपकंपी, असामान्य कमजोरी, बहुत अधिक पसीना या भ्रम जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ न करें।
डायबिटीज़ होने पर संभव हो तो ब्लड शुगर जांचें और अपने डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार कदम उठाएं। अगर ब्लड शुगर कम होने का संदेह हो या डिहाइड्रेशन के लक्षण बढ़ रहे हों, तो व्रत रोककर उचित चिकित्सा सहायता लें।
सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या गंभीर भ्रम होने पर तुरंत आपातकालीन सहायता लें।
याद रखें: व्रत रखने का निर्णय आपकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होना चाहिए। यदि डॉक्टर निर्जला व्रत को आपके लिए असुरक्षित बताते हैं, तो व्रत न रखने या उसके तरीके में बदलाव करने पर विचार करें।
| डॉक्टर की राय “किसी पुरानी बीमारी में व्रत रखने का निर्णय केवल परंपरा या पहले के अनुभव के आधार पर नहीं लेना चाहिए। महिला की दवाएं, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को समझना ज़रूरी है। व्रत के दौरान कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।” डॉ. गुरुदत्त अमीन, बीएएमएस, एमडी, पीजीडीईएमएस 19+ वर्षों का क्लिनिकल अनुभव, सीएमओ, माधवबाग |
करवा चौथ पर व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह क्यों ज़रूरी है?
डायबिटीज़ में उपवास के दौरान जोखिम व्यक्ति की दवाओं, ब्लड शुगर नियंत्रण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं पर निर्भर कर सकता है। इसी कारण उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह और जरूरत के अनुसार दवा प्रबंधन की योजना बनाने की सिफारिश की गई है (Kalra et al., 2015; NIDDK, 2020)।
डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री और दवाओं की समीक्षा करके बता सकते हैं कि निर्जला व्रत आपके लिए सुरक्षित है या नहीं। यदि व्रत रखना उचित नहीं है, तो स्वास्थ्य को जोखिम में डालने से बचना चाहिए।
अगर आपको डायबिटीज़ या दिल से जुड़ी समस्या है, तो त्योहार से पहले ही अपनी दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर चर्चा करें। लक्षण दिखाई देने तक इंतज़ार न करें।
करवा चौथ पर अपनी सेहत का ध्यान रखें
त्योहार के दौरान अपनी स्वास्थ्य स्थिति को नज़रअंदाज़ न करें। अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है, तो व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें और उनके निर्देशों के अनुसार ही निर्णय लें।
माधवबाग में आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों और आधुनिक डायग्नोस्टिक जांच के माध्यम से स्वास्थ्य का आकलन किया जाता है। अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुसार सलाह और मार्गदर्शन के लिए अपने नजदीकी माधवबाग क्लिनिक पर जाएं।
क्या आप करवा चौथ पर अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए सही सलाह चाहते हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या डायबिटीज़ होने पर करवा चौथ का निर्जला व्रत रख सकते हैं?
यह आपकी ब्लड शुगर की स्थिति, दवाओं और डायबिटीज़ से जुड़ी जटिलताओं पर निर्भर करता है। कुछ दवाओं के साथ लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर कम होने का जोखिम बढ़ सकता है। व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
क्या करवा चौथ पर BP की दवा छोड़ सकते हैं?
नहीं। अपनी मर्ज़ी से BP की दवा बंद न करें और न ही उसका समय बदलें। डॉक्टर से पूछें कि व्रत के दौरान दवा कैसे लेनी है।
क्या दिल की बीमारी होने पर निर्जला व्रत रखना सुरक्षित है?
हर व्यक्ति के लिए निर्जला व्रत सुरक्षित नहीं होता। बीमारी की गंभीरता, दवाओं और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर जोखिम बदल सकता है। अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लें।
व्रत के दौरान चक्कर आएं तो क्या करना चाहिए?
सुरक्षित जगह बैठें या लेटें और लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। डायबिटीज़ होने पर संभव हो तो ब्लड शुगर जांचें। तबीयत बिगड़ने पर व्रत रोककर चिकित्सकीय सलाह लें। बेहोशी, सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर आपातकालीन सहायता लें।
क्या व्रत खोलने के बाद मिठाई खा सकते हैं?
डायबिटीज़ होने पर अधिक मात्रा में मिठाई या मीठे पेय लेने से ब्लड शुगर बढ़ सकती है। व्रत खोलने के बाद संतुलित भोजन लें और अपनी निर्धारित भोजन योजना का पालन करें।
संदर्भ
Kalra, S., Bajaj, S., Gupta, Y., Agarwal, P., Singh, S.K., Julka, S., Chawla, R. and Agrawal, N. (2015). ‘Fasts, feasts and festivals in diabetes-1: Glycemic management during Hindu fasts’. Indian Journal of Endocrinology and Metabolism, 19(2), pp. 198–203.
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK). (2020). ‘Fasting Safely with Diabetes’.






