“अब उम्र हो गई है, थोड़ी सांस तो फूलेगी ही।” यह वाक्य लगभग हर घर में कभी न कभी सुनाई देता है, खासकर जब घर के 40-50 साल से ऊपर के किसी सदस्य को सीढ़ियाँ चढ़ते समय हाँफना, पैरों में हल्की सूजन या शाम होते-होते थकान महसूस होने लगती है। परिवार वाले इसे उम्र का स्वाभाविक हिस्सा मानकर टाल देते हैं, और सच कहें तो कई बार डॉक्टर के पास जाने की नौबत तभी आती है जब तकलीफ काफी बढ़ चुकी होती है।
लेकिन यहीं एक जरूरी बात समझनी होगी कि ये लक्षण हमेशा सिर्फ बुढ़ापे या सामान्य कमजोरी के नहीं होते। कई बार यही दिल की पंपिंग कम होने के लक्षण होते हैं, जिन्हें डॉक्टरी भाषा में “रिड्यूस्ड इजेक्शन फ्रैक्शन” या हार्ट फेल्योर की शुरुआती अवस्था कहा जाता है।
इस लेख में, डॉ. नयन आपको आसान भाषा में इन छह दिल की पंपिंग कम होने के लक्षणों को समझने, यह जानने कि लोग इन्हें क्यों नज़रअंदाज़ कर देते हैं, यह पता लगाने कि कौन से टेस्ट ज़रूरी हैं, और यह समझने में मदद करेंगे कि कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना बहुत ज़रूरी है।
दिल की पम्पिंग यानी क्या?
दिल एक पंप की तरह काम करता है जिसमें हर धड़कन के साथ यह शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन-युक्त खून पहुँचाता है। इस पंपिंग क्षमता को मापने के लिए डॉक्टर “इजेक्शन फ्रैक्शन” (EF) नाम की माप का इस्तेमाल करते हैं, यानी हर धड़कन में दिल का बायाँ निचला कक्ष (लेफ्ट वेंट्रिकल) कितना प्रतिशत खून बाहर धकेल पाता है।
सामान्य इजेक्शन फ्रैक्शन लगभग 53% से 70% के बीच माना जाता है(Maeder, M.T. 2009)। जब यह आँकड़ा घटकर 50% या उससे कम रह जाता है, तो इसे “हार्ट फेल्योर विद रिड्यूस्ड इजेक्शन फ्रैक्शन” (HFrEF) कहा जाता है यानी सीधी भाषा में, दिल की पंपिंग कमजोर पड़ रही है और कम इजेक्शन फ़्रैक्शन के लक्षण दिखायी देते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कई मरीजों में EF सामान्य होने पर भी लक्षण हार्ट फेल्योर जैसे ही होते हैं, जिसे “प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन” कहा जाता है, इसीलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर अंदाज़ा लगाना काफी नहीं, डॉक्टर की सलाह बहुत जल्द है।
अगर आप या आपके घर में कोई यह सोच रहा है कि हार्ट की पंपिंग कैसे बढ़ाएं, तो सबसे पहला कदम यही है, पहले यह समझना कि पंपिंग कमज़ोर है भी या नहीं, और अगर है तो कितनी। इसके लिए सही जाँच और डॉक्टरी सलाह ही असली रास्ता है, न कि इंटरनेट पर पढ़े घरेलू नुस्खे।
वो 6 संकेत, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज़ कर दिया जाता है
1. सीढ़ी चढ़ते या रोज़मर्रा के काम में सांस फूलना
पहले जो सीढ़ियाँ आसानी से चढ़ी जाती थीं, अब उन्हीं में बीच-बीच में रुकना पड़ता है। यह अक्सर दिल की पंपिंग कम होने के लक्षणों में से एक माना जाता है। हल्की मेहनत में भी सांस फूलना ।
शुरुआत में यह सिर्फ ज्यादा मेहनत के काम में दिखता है, लेकिन धीरे-धीरे रोज़मर्रा की गतिविधियों में भी महसूस होने लगता है।
2. पैरों, टखनों या पेट में सूजन
अगर शाम होते-होते जूते तंग लगने लगें, या टखनों-पैरों में सूजन दिखे, तो इसे सिर्फ “देर तक खड़े रहने” का असर मानकर टालना ठीक नहीं।
जब दिल ठीक से खून पंप नहीं कर पाता, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है जिससे पैरों, टखनों और कभी-कभी पेट में सूजन आती है। अत: इसे भी हार्ट फेलियर के शुरुआती लक्षण से एक मन जाता है । (Foster, S.B., 1974)
3. रात में अचानक सांस फूलना या लेटने में दिक्कत
यह संकेत खासतौर पर गंभीर माना जाता है। कई मरीज रात में सोते समय अचानक सांस फूलने से जाग जाते हैं, या सीधा लेटने पर असहजता महसूस होने पर तकिए के सहारे थोड़ा ऊँचा होकर सोना पड़ता है। डॉक्टरी भाषा में इसे “ऑर्थोप्निया” और “पैरॉक्सिस्मल नॉक्टर्नल डिस्पनिया” कहा जाता है, और यह फेफड़ों में तरल जमा होने का संकेत हो सकता है।

4. लगातार बनी रहने वाली थकान और कमजोरी
एक-आध दिन थका हुआ महसूस करना अलग बात है, लेकिन अगर हफ्तों से लगातार थकान बनी हुई है, रोज़ के काम भी भारी लगने लगे हैं, और आराम करने के बाद भी ताज़गी महसूस नहीं होती तो यह शरीर के अंगों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन न पहुँचने का नतीजा हो सकता है।
5. अचानक और तेज़ी से वज़न बढ़ना
यह संकेत अक्सर सबसे ज्यादा चौंकाने वाला होता है, क्योंकि यह खाने-पीने से जुड़ा वज़न बढ़ना नहीं होता। शरीर में तरल पदार्थ जमा होने की वजह से कुछ ही दिनों में 2-3 किलो तक वज़न बढ़ सकता है । यह एक ऐसा संकेत है जिसे बहुत कम लोग दिल से जोड़कर देखते हैं। अत: इसे भी हार्ट फेलियर के शुरुआती लक्षण से एक मन जाता है ।
6. रात में बार-बार पेशाब आना और भूख कम लगना
दिन में सामान्य लगने वाले, लेकिन रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना, भूख कम लगना, या हल्की मतली जैसा महसूस होना भी दिल की पंपिंग कमजोर होने के कम पहचाने जाने वाले संकेतों में शामिल हैं । ये लक्षण अक्सर पेट या पाचन की समस्या समझकर नजरअंदाज़ कर दिए जाते हैं।
लोग इन संकेतों को नजरअंदाज़ क्यों कर देते हैं?
इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि ये लक्षण धीरे-धीरे, बहुत हल्के तरीके से शुरू होते हैं और एक दिन में इतने नहीं बढ़ते कि तुरंत डॉक्टर के पास जाने का मन बने। ऊपर से भारतीय घरों में उम्र बढ़ने के साथ थोड़ी सुस्ती, थकान और सांस फूलने को “सामान्य” मान लेने की आदत भी गहरी है।
कई बार परिवार के लोग खुद मरीज को यह कहकर आराम देते हैं कि “यह तो उम्र का असर है,” जबकि असल में शरीर एक चेतावनी दे रहा होता है।
एक और वजह यह भी है कि हार्ट फेल्योर के शुरुआती लक्षण अक्सर अलग-अलग दिखते हैं और एक साथ नहीं आते इसलिए इन्हें आपस में जोड़कर देखना मुश्किल हो जाता है। महिलाओं में तो यह और भी जटिल हो सकता है, क्योंकि उनमें थकान और हल्की मतली जैसे लक्षण ज्यादा प्रमुख होते हैं, जिन्हें अक्सर तनाव या पाचन की समस्या समझ लिया जाता है।
अगर ऐसे बदलाव बार-बार महसूस हो रहे हैं, तो समय पर हृदय की जांच कराना कारण को समझने में मदद कर सकता है।
बिना जाँच के अंदाज़ा न लगाएँ
अगर ऊपर बताए गए दिल की पंपिंग कम होने के लक्षणों में से एक या ज्यादा लक्षण लगातार दिख रहे हैं, तो यहा निम्नालिखित जाँचों कारवना जरूरी है:
इकोकार्डियोग्राम (Echo)
यह दिल की पंपिंग क्षमता यानी इजेक्शन फ्रैक्शन नापने की सबसे आम और भरोसेमंद जाँच है।
ईसीजी (ECG/EKG)
दिल की धड़कनों की लय और बिजली-संकेतों की जाँच के लिए।
छाती का एक्स-रे
फेफड़ों में तरल जमा होने की स्थिति समझने के लिए।
खून की जाँचें
जिसमें बीएनपी (BNP) जैसी जाँच शामिल है, जो दिल पर पड़ रहे दबाव का संकेत देती है।
स्ट्रेस टेस्ट या कार्डियक कैथेटराइज़ेशन
जरूरत पड़ने पर, ब्लॉकेज या अन्य कारणों की गहराई से जाँच के लिए।
ये सभी जाँचें बताती हैं कि पंपिंग कमजोर है या नहीं, कितनी कमजोर है, और इसके पीछे क्या कारण हो सकता है और यही जानकारी सही इलाज की दिशा तय करती है।
अगर आप या आपकी प्रियजन माई से किसी को भी हार्ट फेल्योर की शुरुआत लक्षण दिखाई देता है तो यहां ऊपर लिखित जाच के लिए अपने नजदीकी माधवबाग क्लिनिक में आज ही कंसल्टेशन बुक करें।
हार्ट फेलियर की शुरुआत लक्षण के बारे में सुचना
कुछ स्थितियाँ इंतज़ार करने लायक नहीं होतीं। अगर निम्न में से कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें:
- बिना किसी मेहनत के भी अचानक तेज़ सांस फूलना
- सीने में दर्द, भारीपन या दबाव महसूस होना
- रात में अचानक दम घुटने जैसा महसूस होकर नींद खुलना
- होंठ या उँगलियों का नीला पड़ना
- बेहोशी या बहुत ज्यादा चक्कर आना
सांस फूलना, पैरों में सूजन या रात में दम घुटना बार-बार हो रहा है तो हार्ट फंक्शन जाँच बुक करें।
“स्वास्थ्य के संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें, क्योंकि सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। दिल की हर धड़कन अनमोल है, उसकी हर चेतावनी को गंभीरता से लें। ”
– डॉ.नयन जाधव
बीएमस (मुंबई)
कन्सल्टंट डॉक्टर
माधवबाग मालाड ईस्ट क्लिनिक
माधवबाग की दृष्टि से हार्ट की पंपिंग कैसे बढ़ाएं
अगर जाँच में दिल की पंपिंग कमजोर पाई जाती है, तो घबराने की जरूरत नहीं, आज की चिकित्सा पद्धति में इसे नियंत्रित करने और सुधारने के कई भरोसेमंद तरीके मौजूद हैं। लेकिन यह एक बार की दवा से ठीक होने वाली बात नहीं, यह एक सतत, डॉक्टर की निगरानी में चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें दवाइयों के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव, नमक और तरल पदार्थ का नियंत्रण, नियमित वज़न-जाँच और समय-समय पर इकोकार्डियोग्राम दोहराना शामिल होता है।
इसके लिए माधवबाग एक इंटीग्रेटेड तरीका अपनाता है, जिसमें पंचकर्म जैसे पारंपरिक आयुर्वेदिक इलाज और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स को मिलाया जाता है। इससे न सिर्फ़ लक्षणों को कम किया जाता है, बल्कि बीमारी की जड़ का भी इलाज किया जाता है। इसमें हर्बल दवाएं, हर व्यक्ति के हिसाब से डाइट और एक्सरसाइज़ प्लान, और ‘mib पल्स’ जैसे लगातार मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं, जो इमरजेंसी की स्थिति में डॉक्टर को तुरंत अलर्ट करने में मदद कर सकते हैं। इलाज के बारे में और जानने के लिए, यहाँ पढ़ें।
Heart Blockage Ka Best Treatment? Angioplasty, Bypass Ya Medicines !
आखिर में एक बात
सांस फूलना, थकान या पैरों में सूजन, इन्हें “बस उम्र का असर” कहकर टाल देना आसान है, लेकिन कई बार यही शरीर की सबसे पहली चेतावनी होती है। अगर आपने या आपके घर में किसी ने ये दिल की पंपिंग कम होने के लक्षण बार-बार महसूस किए हैं, तो एक बार सही जाँच करवा लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। समय पर पहचान और सही निगरानी से इस स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
अपनी जाँच की योजना बनाने के लिए आज ही अपने नज़दीकी माधवबाग क्लिनिक में परामर्श करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- दिल की पंपिंग कम होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
सबसे आम शुरुआती लक्षणों में हल्की मेहनत में सांस फूलना, लगातार थकान, पैरों में सूजन, रात में सांस फूलकर नींद खुलना और अचानक वज़न बढ़ना शामिल हैं। ये लक्षण अक्सर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए शुरुआत में इन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है।
- कम इजेक्शन फ्रैक्शन के लक्षण और सामान्य कमजोरी में फर्क कैसे पता करें?
सामान्य कमजोरी आमतौर पर आराम करने से कम हो जाती है, जबकि दिल की पंपिंग से जुड़ी थकान और सांस फूलना बार-बार लौटता है, और धीरे-धीरे रोज़मर्रा के कामों में भी दिखने लगता है। पक्के तौर पर जानने का एकमात्र तरीका इकोकार्डियोग्राम जैसी जाँच है।
- क्या हार्ट की पंपिंग कैसे बढ़ाएं, इसका कोई घरेलू तरीका है?
पंपिंग क्षमता में सुधार दवाइयों, जीवनशैली में बदलाव और डॉक्टर की नियमित निगरानी के मेल से होता है। बिना जाँच और चिकित्सकीय सलाह के कोई भी घरेलू उपाय या सप्लीमेंट खुद से शुरू करना सुरक्षित नहीं है।
- क्या ये लक्षण सिर्फ बुज़ुर्गों में ही दिखते हैं?
नहीं, हालांकि 40 साल से ऊपर के लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है, लेकिन डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या पहले से दिल की बीमारी वाले युवा लोगों में भी यह हो सकता है।
- जाँच में अगर पंपिंग सामान्य से थोड़ी कम निकले, तो क्या यह हमेशा गंभीर होता है?
मामले की गंभीरता अलग होती है। इजेक्शन फ्रैक्शन कितना कम है, लक्षण कितने पुराने हैं, और अन्य बीमारियाँ (जैसे डायबिटीज़ या हाई बीपी) हैं या नहीं यह सब मिलाकर डॉक्टर तय करते हैं कि इलाज की दिशा क्या होनी चाहिए।
संदर्भ सूची
- Maeder, M.T. and Kaye, D.M., 2009. Heart failure with normal left ventricular ejection fraction. Journal of the American College of Cardiology, 53(11), pp.905-918.
- Foster, S.B., 1974. Pump Failure. The American Journal of Nursing, pp.1830-1834.






