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मोटापा कम करने के ये 6 तरीके अपनाकर फर्क खुद देखें

मोटापा कम करने के ये 6 तरीके अपनाकर फर्क खुद देखें
Dr. Priti Muramkar

Medically Reviewed By

Dr. Priti Muramkar

Last Updated

28 Sept 2026

अगर आपने भी कई बार डाइट शुरू की, कुछ हफ्तों तक जिम गए और फिर वज़न वापस बढ़ गया, तो आप अकेले नहीं हैं। मोटापा कम करना सिर्फ कम खाना या ज्यादा एक्सरसाइज़ करना नहीं है। सही डाइट, रोज़ की गतिविधि, नींद, पानी, नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की मदद, इन सभी का साथ में काम करना ज़रूरी है।

यहां 6 ऐसे तरीके हैं जिन्हें लंबे समय तक अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

बार-बार कोशिश के बावजूद वज़न कम नहीं हो रहा? अपनी स्थिति समझने के लिए आज ही Health Assessment बुक करें।

तरीका 1: क्या आप कम खा रहे हैं, लेकिन सही नहीं खा रहे?

वज़न कम करने के लिए बहुत कम खाना शुरू कर देना या कार्ब्स जैसी किसी एक चीज़ को पूरी तरह बंद कर देना जरूरी नहीं है। ऐसी डाइट कुछ समय तक चल सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसे बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसके बजाय अपने खाने की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान दें।

  • हर मील में सब्ज़ी, प्रोटीन और साबुत अनाज को शामिल करें।
  • तली हुई चीज़ों को रोज़ खाने के बजाय कभी-कभी लें।
  • रिफाइंड चीनी और बहुत ज्यादा मीठी चीज़ों की मात्रा कम करें।
  • खाना बहुत देर तक टालने से बचें, क्योंकि इससे अगली मील में जरूरत से ज्यादा खाने की संभावना बढ़ सकती है।
  • पैकेज्ड और प्रोसेस्ड स्नैक्स लेते समय लेबल पर चीनी, फैट और कैलोरी की मात्रा देखें।
  • घर का सामान्य खाना भी सही मात्रा में लेकर वज़न प्रबंधन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

वज़न कम करने के लिए आपको हर दिन अलग-अलग डाइट ट्राय करने की जरूरत नहीं है। ऐसी डाइट ज्यादा उपयोगी होती है जिसे आप महीनों तक आसानी से अपना सकें। संतुलित और लंबे समय तक अपनाई जा सकने वाली डाइट इसी वजह से ज्यादा व्यावहारिक हो सकती है।

तरीका 2: वज़न घटाने के लिए जिम जरूरी है, रोज़ चलना नहीं?

एक्सरसाइज़ का मतलब सिर्फ जिम जाना नहीं है। दिनभर में आप कितने सक्रिय रहते हैं, यह भी मायने रखता है। अगर जिम जाना आपके लिए मुश्किल है, तो रोज़ चलना, सीढ़ियां चढ़ना और लंबे समय तक बैठे रहने से बचना भी शुरुआत हो सकती है।

  • हफ्ते में कम से कम 5 दिन, करीब 30 मिनट तेज़ चलने या टहलने की कोशिश करें।
  • जहां संभव हो, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
  • लगातार बैठे रहने की बजाय हर 1–2 घंटे में कुछ मिनट चलें।
  • घर के काम और दूसरी रोज़मर्रा की गतिविधियों को भी अपनी कुल शारीरिक गतिविधि का हिस्सा मानें।
  • अगर जोड़ों में दर्द या कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह से अपने लिए सही गतिविधि चुनें।

सबसे अच्छी एक्सरसाइज़ वही है जिसे आप नियमित रूप से कर सकें। एक महीने तक बहुत ज्यादा एक्सरसाइज़ करने के बजाय रोज़ थोड़ी गतिविधि बनाए रखना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ दिनचर्या वज़न को लंबे समय तक संभालने में मदद कर सकती है।

तरीका 3: रात की नींद खराब है तो वज़न कम करना भी मुश्किल हो सकता है

वज़न कम करने की कोशिश में लोग अक्सर डाइट और एक्सरसाइज़ पर ध्यान देते हैं, लेकिन नींद को नजरअंदाज कर देते हैं।

कम या अनियमित नींद भूख और खाने की इच्छा को प्रभावित कर सकती है। इससे दिन में ज्यादा खाने या मीठे और ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की इच्छा बढ़ सकती है।

इसलिए वजन कम करने की कोशिश में नींद को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

  • हर रात करीब 7–8 घंटे की नींद का लक्ष्य रखें।
  • सोने और जागने का समय रोज़ लगभग एक जैसा रखें।
  • सोने से पहले भारी भोजन कम करें।
  • रात में बहुत देर तक मोबाइल या दूसरी स्क्रीन देखने से बचने की कोशिश करें।
  • अगर लगातार खर्राटे, दिन में बहुत ज्यादा नींद या नींद से जुड़ी दूसरी परेशानी है, तो डॉक्टर से बात करें।

सिर्फ डाइट बदलकर वज़न कम करने की कोशिश करने के बजाय अपनी नींद की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

तरीका 4: हर बार भूख लगे तो खाना जरूरी नहीं, पहले पानी देखें

कई बार प्यास और भूख का एहसास एक जैसा लग सकता है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक, मीठी चाय और पैक्ड जूस जैसी चीज़ों से पेट भरे बिना ही अतिरिक्त चीनी और कैलोरी मिल सकती है।

इसलिए दिनभर क्या पी रहे हैं, इस पर भी ध्यान दें।

  • दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।
  • कोल्ड ड्रिंक और पैक्ड जूस की जगह बिना चीनी वाला नींबू पानी या छाछ जैसे विकल्प चुन सकते हैं।
  • चाय और कॉफी में चीनी की मात्रा धीरे-धीरे कम करें।
  • बार-बार मीठे पेय लेने की आदत को कम करें।
  • अगर आपको कोई ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें पानी की मात्रा सीमित रखने की सलाह दी गई है, तो डॉक्टर की सलाह का पालन करें।

कई छोटे बदलाव रोज़ की कुल कैलोरी कम करने में मदद कर सकते हैं, बिना हर समय भूखा रहने की जरूरत के।

तरीका 5: जब सिर्फ डाइट से बात न बने, तो क्या पंचकर्म विकल्प हो सकता है?

हर व्यक्ति का वज़न बढ़ने का कारण एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों में खाने की आदतों के साथ कम शारीरिक गतिविधि, नींद की कमी, इंसुलिन रेज़िस्टेंस, हार्मोन से जुड़ी समस्या या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी भूमिका निभा सकती हैं।

अगर डाइट और शारीरिक गतिविधि में बदलाव के बावजूद वज़न कम करना मुश्किल हो रहा है, तो डॉक्टर से मूल्यांकन कराना जरूरी है।

ऐसे मामलों में डॉक्टर की निगरानी में आयुर्वेदिक उपचार और पंचकर्म को डाइट और लाइफस्टाइल बदलाव के साथ शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। आयुर्वेद में मोटापे के उपचार पर प्रकाशित एक पुराने रिसर्च में भी आयुर्वेदिक उपचार के प्रभाव का अध्ययन किया गया था। (Paranjpe, Patki & Patwardhan, 1990)

पंचकर्म हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। आपकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, दवाइयों और शरीर की स्थिति देखकर डॉक्टर यह तय करते हैं कि कौन सी प्रक्रिया आपके लिए उचित है।

इसलिए सिर्फ वज़न कम करने के लिए खुद से कोई पंचकर्म प्रक्रिया शुरू न करें।

तरीका 6: सिर्फ तराजू पर दिख रहा नंबर ही आपकी पूरी कहानी नहीं बताता

वज़न कम करने की कोशिश में तराजू पर दिखने वाला नंबर सबसे पहले ध्यान खींचता है। लेकिन सिर्फ वजन कम होना ही पूरी तस्वीर नहीं बताता।

कमर की माप, ब्लड शुगर, HbA1c, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे मापदंड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, खासकर अगर मोटापे के साथ डायबिटीज़, हाई BP या कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी है।

इसलिए अपनी प्रगति को केवल वजन से न देखें।

  • महीने में एक बार वज़न और कमर की माप नोट करें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और HbA1c की जांच कराएं।
  • नियमित रूप से BP चेक करें।
  • जरूरत के अनुसार कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
  • अपनी नींद, ऊर्जा, रोज़ की गतिविधि और खाने की आदतों में बदलाव भी नोट करें।

अगर वजन बहुत तेजी से बढ़ रहा है, कमर लगातार बढ़ रही है या साथ में शुगर और BP भी बढ़े हुए हैं, तो सिर्फ डाइट बदलने के बजाय डॉक्टर से सही मूल्यांकन कराना बेहतर है।

Madhavbaug Weight Loss Reversal Programme

माधवबाग के Weight Loss Reversal Programme में वज़न को सिर्फ कम कैलोरी लेने की समस्या के रूप में नहीं देखा जाता। कार्यक्रम का उद्देश्य मेटाबॉलिज्म और उससे जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करना है।

डॉक्टर की जांच के आधार पर डाइट, पंचकर्म, शारीरिक गतिविधि और आयुर्वेदिक उपचार को योजना में शामिल किया जा सकता है। मरीज की प्रगति को समझने के लिए वजन, BMI, कमर की माप, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जैसे मापदंडों की नियमित निगरानी भी की जाती है।

इस तरह की योजना का उद्देश्य केवल तराजू पर कम नंबर देखना नहीं, बल्कि वज़न के साथ जुड़े मेटाबॉलिक जोखिमों को भी समझना और उन पर काम करना है।

क्या रिसर्च में भी ऐसे बदलाव देखे गए हैं?

माधवबाग से जुड़े प्रकाशित अध्ययनों में पंचकर्म, डाइट और लाइफस्टाइल बदलाव को साथ लेकर किए गए कार्यक्रमों में मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के कुछ मापदंडों में सुधार दर्ज किया गया है।

एक प्रकाशित अध्ययन में डॉक्टर की निगरानी वाले 90-दिन के पंचकर्म और लाइफस्टाइल कार्यक्रम के दौरान औसत वज़न 68.31 किलो से घटकर 63.82 किलो हुआ। कमर की माप और कोलेस्ट्रॉल में भी सुधार देखा गया। (Kshirsagar, Lakariya & Khan, 2024)

एक अलग अध्ययन में 90-दिन के कार्यक्रम के बाद शुरुआती HbA1c 6.6–9.0% वाले मरीजों में औसत HbA1c 6.12% तक आया। (Muramkar, Kulthe & Ghadigaonkar, 2024)

इन परिणामों को हर व्यक्ति के लिए तय परिणाम नहीं माना जा सकता। वज़न और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में बदलाव उम्र, खान-पान, शारीरिक गतिविधि, दवाइयों, स्वास्थ्य स्थिति और उपचार का पालन जैसे कई कारकों पर निर्भर करते हैं।

एक मरीज में क्या बदलाव देखा गया?

माधवबाग की प्रकाशित केस स्टडी में मुंबई के मीरा रोड के 38 वर्षीय पुरुष का उदाहरण दिया गया है। उन्हें 8 वर्षों से टाइप 2 डायबिटीज़ थी और साथ में गंभीर मोटापा और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी था।

शुरुआत में:

  • वज़न: 144 किलो
  • BMI: 51
  • HbA1c: 11.5%
  • LDL: 151 mg/dL

उनकी उपचार योजना में व्यक्तिगत आयुर्वेदिक दवाएं, डॉक्टर की सलाह के अनुसार पंचकर्म, संरचित कम-कैलोरी डाइट, वॉकिंग और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग शामिल थे। डायबिटीज़ की दवाइयों की भी डॉक्टर की निगरानी में समीक्षा की गई।

करीब 3 महीने बाद:

  • वज़न: 120 किलो
  • BMI: 42
  • HbA1c: 6.2%
  • LDL: 80 mg/dL

केस स्टडी के अनुसार उनकी चलने और खड़े रहने की क्षमता में भी सुधार हुआ और बाद की फॉलो-अप अवधि में उन्होंने नियमित एक्सरसाइज़ जारी रखी।

यह एक मरीज का परिणाम है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति में इतने ही समय में इतना ही वज़न या HbA1c कम होगा।

डॉक्टर की राय

“हम मरीज़ों से यह नहीं कहते कि रातोंरात सब कुछ बदल दें। हम पहले देखते हैं कि उनकी मौजूदा दिनचर्या में ऐसा कौन सा छोटा बदलाव किया जा सकता है, जिसे वे लंबे समय तक जारी रख सकें। लगातार किए गए छोटे बदलाव ही समय के साथ बड़ा फर्क ला सकते हैं।”

डॉ. गुरुदत्त अमीन, बीएएमएस, एमडी, पीजीडीईएमएस
19+ वर्षों का क्लिनिकल अनुभव, सीएमओ, माधवबाग

अगला कदम खुद से शुरुआत करने से पहले सही असेसमेंट कराएं

अगर आपने कई बार डाइट और एक्सरसाइज़ शुरू की है, लेकिन कुछ समय बाद वज़न फिर बढ़ जाता है, तो अगली बार किसी नई ट्रेंडिंग डाइट या वर्कआउट को शुरू करने से पहले अपनी स्थिति समझना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

एक हेल्थ असेसमेंट में आपकी डाइट, वजन, कमर की माप, ब्लड शुगर, BP, लाइफस्टाइल और जरूरत के अनुसार दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों को देखा जा सकता है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि आपके वज़न को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण क्या हैं।

माधवबाग में हेल्थ असेसमेंट के बाद डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार डाइट, एक्सरसाइज़, आयुर्वेदिक उपचार या पंचकर्म-आधारित योजना की जरूरत पर सलाह दे सकते हैं। अपने नज़दीकी माधवबाग क्लिनिक पर विज़िट करें या हमसे संपर्क करें। सही शुरुआत आपके लिए एक ऐसी दिनचर्या बनाने में मदद कर सकती है, जिसे आप लंबे समय तक आसानी से अपना सकें।

अगर बार-बार कोशिश के बावजूद वज़न कम नहीं हो रहा, तो एक कंसल्टेशन आपकी स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सिर्फ डाइट से वज़न कम किया जा सकता है?

डाइट वज़न कम करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन लंबे समय तक परिणाम बनाए रखने के लिए शारीरिक गतिविधि, नींद और रोज़ की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

वज़न कम होने में कितना समय लगता है?

हर व्यक्ति में समय अलग होता है। शुरुआती वजन, उम्र, खान-पान, गतिविधि, नींद और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं। बहुत तेजी से वजन कम करने के बजाय सुरक्षित और टिकाऊ बदलाव पर ध्यान देना बेहतर है।

क्या पंचकर्म हर व्यक्ति के लिए सही है?

नहीं। पंचकर्म की जरूरत और प्रक्रिया व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इसे योग्य डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही कराया जाना चाहिए।

डाइट करने के बाद वज़न फिर क्यों बढ़ जाता है?

बहुत ज्यादा प्रतिबंध वाली डाइट लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो सकता है। पुरानी खाने की आदतें वापस आने, कम शारीरिक गतिविधि या दूसरी वजहों से वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए ऐसी आदतें बनाना जरूरी है जिन्हें लंबे समय तक जारी रखा जा सके।

क्या नींद की कमी से वज़न बढ़ सकता है?

कम या खराब नींद भूख और खाने की इच्छा को प्रभावित कर सकती है। इससे ज्यादा खाने या हाई-कैलोरी खाद्य पदार्थों की इच्छा बढ़ सकती है। इसलिए वज़न प्रबंधन में अच्छी नींद को भी महत्व देना चाहिए।

क्या सिर्फ वजन कम होना ही पर्याप्त है?

नहीं। खासकर मोटापे के साथ डायबिटीज़, हाई BP या कोलेस्ट्रॉल होने पर कमर की माप, ब्लड शुगर, HbA1c, BP और कोलेस्ट्रॉल जैसे दूसरे मापदंड भी महत्वपूर्ण होते हैं।

क्या मोटापा कम करने के लिए डॉक्टर से मिलना जरूरी है?

अगर आपका वजन लगातार बढ़ रहा है, बार-बार डाइट के बाद वापस बढ़ जाता है या साथ में डायबिटीज़, हाई BP, कोलेस्ट्रॉल, जोड़ों की समस्या या दूसरी स्वास्थ्य स्थिति है, तो डॉक्टर से मूल्यांकन कराना उपयोगी हो सकता है।

संदर्भ (References)

Kshirsagar, J., Lakariya, A. and Khan, S. (2024) ‘Impact of ayurvedic panchakarma along with lifestyle modification in restoring glucose tolerance in type 2 diabetics’, International Journal of Basic & Clinical Pharmacology, 13(5), pp. 669–672.

Muramkar, P.S., Kulthe, N. and Ghadigaonkar, P. (2024) ‘Effect of ayurveda-based panchakarma and lifestyle modification on global longitudinal strain in cardiac disorder patients’, International Journal of Advances in Medicine, 11(6), pp. 566–570.

Paranjpe, P., Patki, P. and Patwardhan, B. (1990) ‘Ayurvedic treatment of obesity: a randomised double-blind, placebo-controlled clinical trial‘, Journal of Ethnopharmacology, 29(1), pp. 1-11.

Dr. Priti Muramkar

About The Author

Dr. Priti Muramkar

Dr. Priti Muramkar is a Preventive Cardiologist, Lifestyle Medicine Expert and passionate Heart Health Educator with over 18 years of clinical experience. With a patient-centred approach, she focuses on prevention, early risk identification and comprehensive management of lifestyle-related health conditions. Her expertise includes preventive cardiology, metabolic health, diabetes, hypertension, obesity, cholesterol management, thyroid-related concerns, PCOD, stress management and cardiac rehabilitation after angioplasty and bypass surgery. She has been associated with the care and guidance of more than 12,000 patients, helping them adopt sustainable lifestyle changes for better long-term health. Dr. Priti Muramkar has also contributed to scientific and academic platforms in cardiology and Ayurveda. She presented a case study on ischemia with high NT-proBNP at the 4th International Cardiology Symposium in Baku, Azerbaijan, in 2022. She was also recognised as a presenter at the 2nd National Ayurveda Cardiology Symposium for her work on the role of Ayurveda-based Snehan, Swedan, multiherbal drug decoction and enema in improving GLS and VO₂ max in a patient with ischemic heart disease. Her approach integrates preventive cardiology, personalised nutrition, exercise, stress management and Ayurveda-based therapies, with the vision of making heart disease prevention proactive, personalised and accessible. Empowering people to protect their hearts through preventive care.
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